shivraj singh

कोरोना वायरस संक्रमण का संकट आज देश—प्रदेश ही नहीं, पूरे विश्व के लिए एक गंभीर चुनौती है। इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना संकट से प्रदेश को मुक्त कराने की चुनौती स्वीकारी है। शिवराज की कोरोना संकट से प्रदेश को मुक्त कराने की यह चुनौती न्यूज चैनलों और पोर्टल्स पर सुर्खियों में है। गौरतलब है कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव की स्थिति बढ़ते—बढ़ते 179 तक पहुंच चुकी है और 11 लोगों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में कोरोना संक्रमण से पार पाना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहाना के लिए आसान नहीं होगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सामने 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालते समय सबसे बड़ी चुनौती कोरोना संक्रमण संकट का भय जनता के मन से निकालने और सभी व्यवस्थाऍं बहाल करने की थी। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना संक्रमण से बचने के लिये सावधानियां अपनाने के लिये तैयार करना बेहद मुश्किल था। साथ ही, बेहद कम समय में स्वास्थ्य अमले को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी आसान नहीं था, क्योंकि प्रदेश में टेस्टिंग किट, लैब सुविधा, चिकित्सकों, मरीजों और उनके परिवार की सुरक्षा के लिये उपकरण, मास्क, पीपीई किट आदि सीमित थे। कोरोना संक्रमण के संभावित और प्रभावित मरीजों की देखरेख के लिये नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण और तकनीकी साधन उपलब्ध कराना जरूरी था।

इस तरह की तमाम समस्याओं के बावजूद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संकट से प्रदेश को मुक्त कराने की चुनौती स्वीकारी। उन्होंने कार्यभार ग्रहण करते ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर एक ओर जहां सभी जिलों में स्थिति की समीक्षा की, वहीं प्रदेश की जनता को संबोधित कर अपने साथ लिया। जनसामान्य से संवाद के लिये सीएम हेल्पलाइन और सहायता के लिये कॉल सेंटर को चाक-चौबंद किया गया। अस्पतालों और चिकित्सा अमले के संसाधनों को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया। इसका परिणाम रहा कि प्रदेश में स्थिति बदलनी आरंभ हो गयी।

बेहतर हुए स्वास्थ्य संसाधन, क्षमता भी बढ़ी

आज मध्यप्रदेश में 20 हजार आई.टी.पी.सी.आर. हैं। वहीं टेस्टिंग क्षमता 6 लैब में 500 टेस्ट प्रतिदिन है, जबकि इस क्षमता को बढ़ाकर 14 लैब में 1,000 टेस्ट प्रतिदिन की जाना है। वर्तमान में प्रदेश में 29,795 पीपीई किट्स हैं तथा 5 हजार पीपीई किट्स प्रतिदिन बांटी जा रही हैं। आज दी जा रही हाइड्रो क्लोरोक्वीन गोलियों की संख्या 2 लाख 25 हजार है। आगामी चार दिनों में 10 लाख गोलियां और मिलने के आसार हैं। 50 हजार एन-95 मास्क वितरित किए जाएंगे। आक्सीजन सिलेंडर 3,324 हैं और 1,000 सिलेण्डर का ऑर्डर भी दिया गया है।

अस्पतालों में बेड, वेन्टिलेटर की व्यवस्था

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से व्यवस्थाओं को गति देने के प्रयासों के कारण ही प्रदेश में 24 हजार से अधिक बेड मरीजों के लिये उपलब्ध है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सागर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में 394 आईसीयू बेड और 319 वेंटिलेटर तथा 8 निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में 418 आईसीयू बेड और 132 वेंटिलेटर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र के चिन्हित 107 अस्पतालों में 276 आईसोलेशन बेड, 1261 आईसीयू बेड और 385 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए हैं।

6 टेस्टिंग लैब संचालित, पांच अन्य जल्द होंगी शुरू

मध्यप्रदेश में कोविड-19 वायरस संक्रमण की टेस्टिंग की पर्याप्त सुविधा विकसित कर ली गयी है। वर्तमान में 6 टेस्टिंग लेब एम्स भोपाल, जीएमसी भोपाल, बीएमएचआरसी भोपाल, एनआईआरटीएच जबलपुर, डीआरडीई ग्वालियर और मेडिकल कॉलेज इंदौर में संचालित है। पाँच अन्य लेब शीघ्र आरंभ होंगी।

सभी जिलों में टेलीमेडिसिन सेंटर की स्थापना

कोविड प्रभावित होम क्वरंटाइन किये गये लोगों को घरों से सीधे संवाद करने के लिये सभी जिलों में टेलीमेडिसिन केन्द्र की स्थापना की गयी है। वीडियो कॉलिंग के माध्यम से प्रभावित व्यक्ति से चिकित्सक सीधे संवाद कर सकते हैं। क्वरंटाइन किये गये व्यक्तियों की निगरानी के लिये सार्थक एप विकसित किया गया है। इससे फोटो बेस्ड जियो टेगिंग पद्धति से मरीजों की निगरानी की जा रही है। प्रदेश के अनेक जिलों में 26 हजार 800 स्वयंसेवकों ने सार्थक एप पर मरीजों की निगरानी के लिये अपनी सहमति प्रदान की है।

इसके अलावा नर्सों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को तत्काल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डब्ल्यूएचओ तथा यूनिसेफ के माध्यम से प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कर जूम एप द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

शिवराज सिंह चौहान द्वारा कोरोना नियंत्रण व रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों से आमजन को उम्मीद बंधती है कि उनके मुख्यमंत्री कोरोना संकट से उबरने में सफल होंगे। बहरहाल कोरोना से पार पाना इतना आसान भी नहीं है और लॉकडाउन का यदि सख्ती से पालन नहीं किया गया तो भावी तस्वीर बेहद दुखदायी हो सकती है। ऐसे में आमजन का भी दायित्व बनता है कि वह कोरोना महामारी की संजीदगी समझते हुए घर में रहे और इसकी रोकथाम में पूरा सहयोग दे।

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